रविवार, 10 अक्तूबर 2010

जादू भरी ख़ुशी की तान..
एकाएक पलटा खाती है
कोई उदास साज़ बजता है ,
याद की छोटी सी लट
ज़ो तुमने कान के पीछे की थी
पलकों पे लहराती है..
यकायक,
सारे संगीत ख़त्म हो जाते है
सारा अँधेरा...
खिड़की के रास्ते कमरे में उतर आता है.
बारिश खत्म हो चुकी है कब की..
बस पत्तों से टपकता पानी
धीरे धीरे शोर कर रहा है..

एक पेड़ अभी भी भीग रहा है...



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उमड़ते काले सायों के साथ,
मटमैले धब्बो वाली
उड़ती रुईं के नीचे..
चांदनी के बेतरतीब,
उनींदे तैरते टुकड़ो के बीच
गीली रेत पे..
हथेलियों पे चेहरे को टिका..
सुनुगी..
तुमसे..
मेरे लिए लिखी नज़्म..
कायनात की सारी आवाज़े,
खामोश हो जाएँगी उस लम्हे...


सुबह से ठीक पहले का आखिरी सपना..

29 टिप्‍पणियां:

  1. कायनात की सारी आवाज़े,
    खामोश हो जाएँगी उस लम्हे..

    बहुत खूबसूरती से लिखी आपने मन की बात

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  2. याद की छोटी सी लट
    ज़ो तुमने कान के पीछे की थी
    पलकों पे लहराती है..
    ............
    तुम्हारी यह दुनिया बेहद हसीन है !!!!

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  3. दिल से लिखने वाले ऐसे क्यों होते हैं

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  4. याद की छोटी सी लट
    ज़ो तुमने कान के पीछे की थी
    पलकों पे लहराती है..
    क्या बात है डिम्पल जी. सुन्दर.

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  5. सुंदर प्रस्तुति....

    नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी ।

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  6. bhavpoorna rachana .........shabda shabda dil me utar gaya ...........ek achchhi rachana ke liye dhanyavaad

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  7. बारिश खत्म हो चुकी है कब की..
    बस पत्तों से टपकता पानी
    धीरे धीरे शोर कर रहा है..
    ...............
    .कुछ तो है आपमें
    जो इस कदर हर एक कविता में
    रोर कर रहा है
    ...........सुन्दर है कविता Dimpal ji...

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  8. यह कविता उत्कृष्ट काव्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है...मन की गहरी भवनाओं को आपने अनमोल शब्दों से सजाया है...बधाई।

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  9. डिम्पल जी,

    वाह......वाह .......दाद कबूल फरमाएं.......खुबसूरत अहसासों को बखूबी अल्फाजों में पिरोया है..........जैसे कोई जादू भरी दुनिया.....सच कहा है..... सुबह से ठीक पहले का आखिरी सपना........शुभकामनाये|

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  10. anil kant ji ne kitna khoobsurat sawaal kiya hai..main bhi yahi soch rahi hoon :)

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  11. sapne kitne apne.....sapne hai phir bhi swagat hai!!! wahh wahhh bahut khoob!!

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  12. दिल की बातो को शब्दों में पिरोना बहुत खूब आता है आपको..

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  13. ख़ूबसूरत...पहली वाली कुछ ज्यादा ही

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  14. yay haseen shaam apni
    yay haseen shaam apni
    abhi jiss meiN ghul rahi hai
    teray parahan kee khushboo
    abhi jiss meiN khil rahay heiN
    meray khawab kay shagoofay
    zera dair ka hai manzar

    zera dair meiN ufq par
    khilay ga koi sitaara
    teri simt daik kar woh
    karay ga koi ishara
    teray dil ko aayay ga phir
    kissi yaad ka bullawa
    koi qissa-ay judaaee, koi kaar-ay naamukamal
    koi khawab-ay naa shagufta, koi baat kehnay wali

    humeiN chaahiyay tha milna
    kissi ahad-ay mehrbaaN meiN
    kissi khawab kay yaqeeN meiN
    kissi aur aasmaaN par
    kissi aur sarzameeN meiN
    humeiN chahiyay tha milna…

    parveen shakir....

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  15. बड़े ही सुन्दर ढ़ग से कही मन की बात।

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  16. जितना कुछ भी कहूं कम है...बहुत ही सुन्दर रचना...क्या बात है.मज़ा आ गया.. यूँ ही लिखते रहें...
    मेरे ब्लॉग में इस बार..

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  17. kitna theraav hai aapki lekhni main...mere mastak patal main wahi drashye chal rahe the jaisa ki aapke shabd bol rahe the,..

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  18. कविता के पार्श्व से गहन रूमानियत के स्वर झंकृत हो रहे हैं।
    बड़ी मनभावन प्रस्तुति...काव्य-भाषा हृदयग्राही है।
    बधाई!

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  19. Good Morning :)

    Kya likha hai aapne...
    Khoob ... bahut khoob...!!

    Itne ache words hain... bus kya kahu... dil mein ghar kar liya har lafz ne :)

    Regards,
    Dimple

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  20. गज़ब ... बस पढ़ते ही जा रहा हूँ ... स्तब्ध हूँ ...

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  21. बदलते परिवेश मैं,
    निरंतर ख़त्म होते नैतिक मूल्यों के बीच,
    कोई तो है जो हमें जीवित रखे है,
    जूझने के लिए प्रेरित किये है ,
    उसी प्रकाश पुंज की जीवन ज्योति,
    हमारे ह्रदय मे सदैव दैदीप्यमान होती रहे,
    यही शुभकामनाये!!
    दीप उत्सव की बधाई .............

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  22. डिम्पल जी,
    नमस्ते!
    पढ़ी-लिखी कविता है!
    आशीष
    ---
    पहला ख़ुमार और फिर उतरा बुखार!!!

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  23. bahut maza aaya aapki ye dono kavitaayen padh kar.shukriya.

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