मंगलवार, 19 जनवरी 2010

चाँद ढूँढेगा मुझे,
रात मातम करेंगी.
और मैं?
तुम हो जाउंगी तब.

सूरज रोयेगा,
सुबह 'टा टा' करेगी...
और तब,
मैं आउंगी ना,
तुमसे मिलने.

शाम सिंदूर भर देगी मेरी मञ्जूषा में,
'मरीन बीच' का ज्वार, पछाड़ खा के बेहोश हो जायेगा...
मेरे विरह में.

ग़ज़ल ग़ालिब से खय्याम हो जाएँगी
कविता छायावादी,
हर गुलाब और सुर्ख,
पतझड़ कोई रुत न होगी,
विरह कोई रस न होगा,
दर्द बीत जाएगा,
रेट घडी लेट जायेगी.
समय जनाना हो जाएगा,
और उम्र छुपा लेगा...

तब शायद...

मैं आउंगी !!!

कविता से उतरकर,
कैनवास से कूदकर,
तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
दौड़ते हुए, ....

क़यामत का दिन...
इतनी शिद्दत से चाहती हूँ !!

15 टिप्‍पणियां:

  1. तब शायद...
    मैं आउंगी कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए,
    kitna nyara khayal hai!

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  2. समय जनाना हो जाएगा,
    और उम्र छुपा लेगा...

    बालों में खिज़ाब लगा के....

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  3. Dimple really I'm speechless......hamara man to aap se milne ka karne laga hai .......kamaal hai aap ......God bless you

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  4. तब शायद...
    मैं आउंगी कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए.....

    शब्दों के इस ताने बाने से आपने जादू किया है ...... बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति है ........ कशमकश सी उठ रही है आपको पढ़ कर .......

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  5. बहुत ही खूबसूरत। नहीं खूबसूरत से कुछ ज्‍यादा। नहीं नहीं खूबसूरत से भी ज्‍यादा। एक आम बात को आम बात की तरह कह देना, इसमें तो कोई बात नहीं। बहुत धुंधली बात को उतने ही धुंधलकों और स्‍पष्‍टता की गहराईयों में कहना, उतनी ही छायाओं और रोशनी के साथ... यहां तक कि‍ उसमें उतनी ही नमी भी होना जितनी धुंध में होती है... मुझे लगा कि‍ कुछ ऐसा यहां हुआ है। मुझे लगा कि‍ यदि‍ कोई इंतजार होना चाहे और कोई दि‍लासा उसे दि‍लासा देना चाहे और कुछ होना ही चाहता हो तो इससे बेहतर बयान क्‍या हो सकता है।

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  6. मैं आउंगी कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए..

    प्रेम में सराबोर
    बहुत कुछ कह गए वो चंद भीगे हुए से शब्द

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  7. किसी को यदि प्यार करना सीखना हो तो उतर जाए आँखे और दिल खोलकर ड्रीम्ज़ अनलिमिटेड में ...

    मैं आउंगी कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए..

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  8. मैं भी नीरा जी के बातों को ही उठाता...


    मैं आउंगी कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए.


    ... यह चार लाइन तो तो बस जैसे... !!!!

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  9. I had this bad dream about my sister last night and read your poem this morning. It deepened my sadness. I know your poem holds a much more deeper meaning but its literal meaning made me very sad. Nonetheless a very thought provoking piece of work. 'salamat raho hazaron baras'that is what I wish for my sister and you.

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  10. मैं आउंगी !!!
    कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए, ....
    और तुममें .....बेहद खुबसूरत कल्पना की उडान.

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  11. Bahut jyada acchi hai...par mai kuch personal opinion share karna chahung..

    1) The picture in the middle of this poem don't seem to be a reflection of it. shayad poem itni acchi hai ki mujhe laga ki pic fit nahi baithti.

    2) Kabhi mauka mile to in poems ko awaaz me kaid kijiyega..mujhe lagta hai wo aur bhi sundar hoga...probably jitna sundar aapke poems ka flow rehta hai..wo shabdo me utna sundar roop lega

    regards,
    raj

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  12. ye jo likhane ki ada he na, lazavaab he, shbdo ke saath is tarah khelna..aour use saadhna, vakai bahut achha lagaa..
    khoob kahaa aapne yeh- शाम सिंदूर भर देगी मेरी मञ्जूषा में,
    'मरीन बीच' का ज्वार, पछाड़ खा के बेहोश हो जायेगा...
    मेरे विरह में..., gazab ka bodh he yah../ fir-

    कविता से उतरकर,
    कैनवास से कूदकर,
    तुम्हारी बनाई मूर्तियों से मूर्त होकर,
    दौड़ते हुए, .... waah,,shbd hi mano jeevant ho uthe..., khatka bas yah ki moort hokar kyo? vese yah bhi apne aap me misaal he ki..moortiyo se moort hona...//baharhaal, utkrashth rachna he.

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  13. tab bhi aaungi main
    har haal mein sath nibhane ka khud se wada jo kiya hai

    -Sheena

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  14. और मैं?
    तुम हो जाउंगी तब.

    सूरज रोयेगा,
    सुबह 'टा टा' करेगी...
    और तब,
    मैं आउंगी ना,
    तुमसे मिलने.
    ........mein tum ho jaoongi tab....bahut accha likha hai....

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