शनिवार, 20 मार्च 2010


धुली,
गीली सी,
यादों से,
आहिस्ता आहिस्ता.
कई ख्याल,
सरक के गिरते,
रफ्ता रफ्ता.
उलझती सोचो को,
 संवारा हमने.
अटकती बातों से,
सहलाया उन्हें.
बेख्याली में,
बांधा फिर उम्मीद की,
किसी गांठ से.
सुनहरी फूल इक ख्वाब का भी,
टांका उसमे.
इक सुरमयी शाम यूँ,
मुहब्बत की नज्म हो सिमटी..
ये मुलाकात भी,
पिछली की तरह ही निबटी..

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत कोमल से एहसासों से बुनी प्यारी सी नज़्म....अंतिम पंक्तियों में जैसे सारा दर्द सिमट आया है...अच्छी लगी...

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  2. " सपने जो सोने नहीं देते "

    Such dreams propels us to rise high. Cherish it and work on it.

    Best wishes !

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  3. "ye mulakat bhi pichli ki tarah hi guzri"........mulakat me kasak nazar aati hai............bahut achi likhi hai

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  4. बहुत कोमल से एहसासों से बुनी प्यारी सी नज़्म..

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  5. मैं मुस्कुरा उठा कसम से ! कितना ईमानदार !!!!!

    "ये मुलाकात भी,
    पिछली की तरह ही निबटी"

    कहीं खो गया था इस ख्याल में... एक ग़ज़ल याद आ गयी जगजीत सिंह की...

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  6. इक सुरमयी शाम यूँ,
    मुहब्बत की नज्म हो सिमटी..
    ये मुलाकात भी,
    पिछली की तरह ही निबटी.. mulakaat khyalon mein jo karogi dimple to bas yun hi niptegi....chalo ham khyaal hi badal dete hai :-)

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  7. बहुत बढ़िया
    http://oldandlost.blogspot.com/

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  8. ये मुलाकात भी,
    पिछली की तरह ही निबटी..
    इस मुलाकात पिछ्ली की तरह कहाँ निबटी
    अरे! इसने तो इतनी खूबसूरत नज़्म दी.

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  9. रेतीली हवाये
    बहुत सख्त होती है
    हरियाली को लील जाती है
    पर न जाने यह कौन सी

    सी नमी है ख्वाहिशो की
    जिसे
    ये सख्त हवाये छू भी नही पाती है !

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  10. hmmmmmmm.....main kuch soch rahaa hun....yah padhkar...sochkar baatungaa....are haan yaad aayaa....ye kavita to badi acchhi hai....!!

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  11. hmmmmmm isi tarah....rafta-raftaa badhti rahen aap....illaah........!!

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  12. वाह, ये क्या था...

    अटकती बातों से,
    सहलाया उन्हें.
    बेख्याली में,
    बांधा फिर उम्मीद की,
    किसी गांठ से.

    काफ़ी कुछ आपने फ़सा सा दिया है यहा.. एक maze सी है..निकलने की कोशिश कर रहा हू :)

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  13. बेहद ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने जो प्रशंग्सनीय है! बहुत खूब! बधाई!

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  14. aaahaa ..kya kahne ..kavita ne anoothi pratiti di...bahut dino baad blog par aana hua par itne komal ahsaas padhkar bahut achha laga

    मुहब्बत की नज्म हो सिमटी..
    ये मुलाकात भी,
    पिछली की तरह ही निबटी..
    aur ye panktiyan aapki nazm ko sampoornata pradaan karti hai
    sach me is nazm se mulakaat bhi pichhli ki tarah meethi aur avismarneeya rahi

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