सोमवार, 8 मार्च 2010

साथ साथ,
साफ साफ,
चाहे कुछ ही पल के लिए,
पर चौंका देती है..
कुछ बाते..

मंदिर के बाहर,
प्रसाद के लिए लगी लम्बी कतार में,
मची भगदड़ और तस्वीरे खींचता,
कोई डिज़िटल कैमरा..

जनसंहार से दहल जाते है दिल,
इक बार तो.
जबकि नाभिकीय परीक्षण हो रहे है लगातार..

नववधु की असमय मौत और
 मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारतीय सुन्दरी प्रथम..

बुझा चूल्हा नहीं जलेगा नहीं जलेगा.
''भारत बंद ''किसी धार्मिक संगठन का ऐलान..

औरते जो हर रोज़,
मीलो दूर से पानी लाती.
कोसो दूर से चारा.
या कोई फैशन शो में हो रही कैट वॉक..

दंगे और सेलफोन.
अनपढ़ता या धार्मिक कट्टरपन..

ये कोई कविता नहीं,
किसी भाषा के रोज़ प्रयोग में आने वाले कुछ शब्द मात्र है,
गढ़ लेते है जिनके अर्थ सुविधा अनुसार हम..
हमारी अंतिम प्राथमिकता.

ज्यादा सोचने कि जरूरत नहीं..

11 टिप्‍पणियां:

  1. नए दृश्य अच्छे हैं...

    परसाद = प्रसाद (प्रासाद नहीं )
    गड़ = गढ़

    दो लाइन काम की

    "ये कोई कविता नहीं,
    किसी भाषा के रोज़ प्रयोग में आने वाले कुछ शब्द मात्र है"

    बांकी सब विचार

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  2. नव वधू की असमय मौत और
    मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारतीय सुन्दरी प्रथम..
    इन्ही विरोधाभाषों में तो जूझ रही है भारतीय नारी.......
    सुन्दर कविता ....आभार

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  3. सही कहे तो भारत के अन्दर कई युग जी रहे है एक साथ मे ......कहने को इक्कीसवी सदी है ...............विरोधाभासो के बीच जी रही है औरते........कहने को कुछ शब्द है पर सच्चाई है शब्दो मे !
    शुक्रिया!

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  4. True!we are unable to improve our lot on planet earth, as millions are spent to satiate the curiosity of our bored scientists, busy in designing weapons of mass extermination.As far as the condition of women ,it is far better to go for a catwalk then to die an untimely death( just a thought) , but nothing should compromise morals. A very thought provoking poem.You have such deep insights into human condition and such a great ability to say that through poetry. Well done indeed!

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  5. यक़ीनन ....सिर्फ प्रयोग में आने वाले कुछ शब्द भर है ....इस आभासी दुनिया के
    .

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  6. सच कहा डिम्पल यही कुछ शब्द हैं जिन्होंने हमारे इर्द गिर्द एक आवरण बना रखा है. चाह कर भी हम उससे बाहर नहीं आ पाते या आने अन्हीं दिए जाते. बधाई इस सुन्दर प्रस्तुती पर

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  7. Hello,

    You changed the blog address and I have been searching for it bigtime :(

    How have you been dear??
    Anyhow, like always, a very deep thought in form of such true words. Great work done dear!

    Regards,
    Dimple

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  8. ये कोई कविता नहीं,
    किसी भाषा के रोज़ प्रयोग में आने वाले कुछ शब्द मात्र है,
    गढ़ लेते है जिनके अर्थ सुविधा अनुसार हम..
    हमारी अंतिम प्राथमिकता.
    Nishabd kar diya aapne...

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  9. "सत्य को दर्शाती कविता....."
    amitraghat.blogspot.com

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  10. साथ साथ,
    साफ साफ,
    चाहे कुछ ही पल के लिए,
    पर चौंका देती है..
    कुछ बाते..

    ..यक़ीनन. इन्ही कुछ बातों में दिखते हैं जिंदगी के रंग. यह प्रयोग अच्छा लगा.

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...क्यूंकि कुछ टिप्पणियाँ बस 'टिप्पणियाँ' नहीं होती.