गुरुवार, 5 अगस्त 2010

सपने जो सोने नहीं देते


एक लंबा सफर,
इक छोटा सा सपना...
जादुई संकेतों की
अस्पष्ट अजनबी भाषा के नए शब्द गढ़ने के लिए
उसे कुशल कारीगर बनना है. 
सोचूंगी यही..
अच्छा होता अगर वो चला आता.
रोकूंगी नहीं पर..
प्रेम नहीं रोकता,
सपने तलाशने से.
वो,
मुझसे और उन लोगों से...
बेहतर है,
जो जानते ही नहीं उन्हें तलाश किसकी है.
हम सब फैंकते रहते हैं पासे भविष्य जानने के लिए 
और दे देते हैं अपने आज का आधा हिस्सा इसी में.
निराश नहीं होना उसे 
वह जानता है ..
रात का सबसे अँधेरा पहर भोर से ठीक पहले आता है 
उसे बस पांव के निशान छोड़ते जाना है. 
हवाओं को सब मालूम होता है. 
वह जब चूमेंगी उसके चेहरे को वो  जान लेगा  
 .....मैं अभी जिंदा हूँ... 
और उसका इंतज़ार कर रही हूँ. 
दोष नहीं दूँगी..
उसके चले जाने पे. 
वो मुझे तब भी प्यार करेगा और मैं उसे. 
जबकि दुनिया का इतिहास बनाने में 
उसकी भूमिका पहले से तय है .
मैं सपने देखना फिर भी नहीं छोड़ती.

28 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा करती हैं जो सपने देखना नहीं छोडती हैं. सुन्दर बात है, उत्साहित करने वाली...

    वैसे इन दिनों कविताओं में सर्वनाम का चलन बढ़ता नहीं जा रहा है ? वो क्या है ना इससे चेहरा नुमाया नहीं होता.

    जादुई संकेतों की
    अस्पष्ट अजनबी भाषा के नए शब्द गढ़ने के लिए
    उसे कुशल कारीगर बनना है.

    अच्छा होम वर्क है.

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  2. डिम्पल, मैं कहानी पूरी करके आता हूँ.
    आज अगला भाग शुरू किया है. कोशिश है कि समापन किश्त तक भी पहुच जाऊं ताकि ये छूटी हुई कविताएं पढ़ सकूं.
    फिर मेरा मन इन दिनों कहीं और है तो दोस्तों से जी भर के बातें करना चाहता हूँ.

    किशोर चौधरी

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  3. सपना ही तो एक अपना होता है.......
    इसलिये सपने को देखना अच्छी बात होती है.....

    चलो कही दूर चले
    अपने गाँव की पगडंडी पर
    जहाँ सावन के झुले झुलते है अभी भी
    उन आंखो मे
    जिन्हे माँ बडे प्यार से खिलाती थी


    आज भी इंतजार मे कुछ बहारे
    जिनकी बान्हे सूनी पडी है
    तेरे आमद की आहट से !

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  4. waah....itni behtareen panktiyaan bahut dino k baad padhne ko mili...yun hi likhte rahein.....

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  5. dimple..tumne apna blog change kiya hai kya.."dreamz"..main to is baat se anjaan hi thi..kher bahut bahut samay baad aaj naya pata mila hai...
    soch aur mature ho rahi hai..aur kalam nikhar rahi hai...gud luck! :)

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  6. सूक्ष्म पर बेहद प्रभावशाली कविता...सुंदर अभिव्यक्ति..प्रस्तुति के लिए आभार जी

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  7. हम सब फैंकते रहते हैं पासे भविष्य जानने के लिए
    और दे देते हैं अपने आज का आधा हिस्सा इसी में.
    निराश नहीं होना उसे
    वह जानता है .
    खासकर इन पंक्तियों ने रचना को एक अलग ही ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है शब्द नहीं हैं इनकी तारीफ के लिए मेरे पास...बहुत सुन्दर..

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  8. डिम्पल जी आज पहली बार आपको पढने का मौका मिला...आप के शब्द और उनमें गुंथे भाव अद्भुत ही नहीं प्रभावशाली भी हैं...बहुत अच्छी और सुन्दर रचना है ये आपकी...वाह...मेरी बधाई स्वीकार करें...
    नीरज

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  9. Hello Dimple,

    It is good to dream...
    So, never stop dreaming...
    Beautiful composition dear :)

    Regards,
    Dimple

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  10. प्रेम एक गहनतम अनुभूति है और इससे हमेशा कुछ नया और अच्छा निकलता है...

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  11. Paanv ke nishan sirf raah par hi nahi choode....dil mein yaado ki lau ban jal rahe hain...jinhone shabdo ka roop gadh ek nazm ka haath thama hai

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  12. मंगलवार 10 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ....आपकी अभिव्यक्ति ही हमारी प्रेरणा है ... आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  13. हम सब फैंकते रहते हैं पासे भविष्य जानने के लिए
    और दे देते हैं अपने आज का आधा हिस्सा इसी में.
    ..और यह जानते हुए भी यह कहना कि मैं सपने देखना फिर भी नहीं छोड़ती.वाह!
    ..यही सुखद है. यही सच है.

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  14. sabne dekhne chhodne bhi nahi chahiye..
    ek pyara prayaas......

    Meri Nayi Kavita par aapke Comments ka intzar rahega.....

    A Silent Silence : Zindgi Se Mat Jhagad..

    Banned Area News : Conference, workshop on type 2 diabetes on Aug 21

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  15. जादुई संकेतों की
    अस्पष्ट अजनबी भाषा के नए शब्द गढ़ने के लिए
    उसे कुशल कारीगर बनना है.

    ये कारीगरी, सिर्फ मौसम से तो नहीं उपजती होगी...विश्वास सदाबहार वन है. ख़ूबसूरत.

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  16. पिछले कुछ समय मे इस ब्लॉग पर आयी सशक्ततम रचनाओं मे से एक...और मेरी बेहद पसंदीदा भी..
    कविता एक प्रेममय आशावाद का आह्वान करती है..जहाँ स्नेह कर्तव्य के पैरों की जंजीर नही बनता है.उन पैरों की ताकत बनता है..जहाँ अनुराग का कोई दैहिक-दैविक-भौतिक कारण नही है..किसी प्राप्ति की अपेक्षा नही है..यहाँ प्रेम बाँधता नही है.मुक्त करता है..
    प्रेम नहीं रोकता,
    सपने तलाशने से.

    यह प्रेम मदिरा की तरह बाकी सब कुछ भुला देने का प्रयास नही करता है..यह अमृत है जो जीवन देता है..उसे अर्थ देता है..अस्तित्व के मूलभूत उद्देश्यों का भान कराता है..उनसे विचलित नही होने देता...
    वो,
    मुझसे और उन लोगों से...
    बेहतर है,
    जो जानते ही नहीं उन्हें तलाश किसकी है.
    यह प्रेम मिलन की आस मे व्यग्र नही होता है..यहाँ समय को भींच लेने की अधीरता नही है..यह अनंतकाल तक प्रतीक्षा करता है..और इसलिये अनंतजीवी है..यह प्रेम किसी ज्वार जैसा नही है..खुद समुद्र जैसा है..अविरल, अतल और अमर्त्य..
    अच्छा होता अगर वो चला आता.
    रोकूंगी नहीं पर..
    यह किसी रुद्ध वातायन के अनंतकाल तक वसंत की प्रतीक्षा करने जैसा है..और इससे जनित आशावाद जो पर्वत काट कर दरिया निकाल सकने का स्वप्न देखता है..

    जबकि दुनिया का इतिहास बनाने में
    उसकी भूमिका पहले से तय है .
    मैं सपने देखना फिर भी नहीं छोड़ती.

    ..बड़ी गहरी कविता..देर तक याद रह जाने के लिये बनी है..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  17. ब्लॉग का पता बदल गया है अब समझ आया मुझे अपडेट क्यों नहीं मिलते....खैर एक साथ कई कविता पढ़ने को मिली... मुझे प्रेम कवितायें बहुत पसंद है और साथ ही तुम्हारा अंदाज़े बया... क्योंकि प्रेम को शब्दों में पिरोने में तुम निपुण हो...

    जबकि दुनिया का इतिहास बनाने में
    उसकी भूमिका पहले से तय है .
    मैं सपने देखना फिर भी नहीं छोड़ती...

    निशब्द कर देते हैं शब्द....

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  18. Get your book published.. become an author..let the world know of your creativity. You can also get published your own blog book!

    www.hummingwords.in

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  19. कुछ कह नहीं पाऊँगा ..क्यूंकि कुछ टिप्पणियाँ बस 'टिप्पणियाँ' नहीं होती..

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  20. सुन्दर भाव भरी अभिव्यक्ति...

    यह दुनिया साकार स्वप्नों का प्रतिरूप ही तो है.. गर स्वप्न न होते तो यह स्वपन सरूपी दुनिया भी न होती

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  21. जबकि दुनिया का इतिहास बनाने में
    उसकी भूमिका पहले से तय है .
    मैं सपने देखना फिर भी नहीं छोड़ती....

    और सच है सपने देखना छोड़ना भी नही चाहिए ... ये सपने ही होते हैं जो कर्म की दिशा भी बदल सकते हैं ... प्रेम के मंथन से ही आशा के बीज पनपते हैं .... बहुत गहरी रचना ...

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  22. रात का सबसे अँधेरा पहर भोर से ठीक पहले आता है
    उसे बस पांव के निशान छोड़ते जाना है.
    kya kahu...bahut chu ker chali gayi hai ye panktiya man ko....

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  23. मेरी कहानी पूरी हो गई और आज सुबह से पढ़ रहा हूँ. कविताएं चौंकती है. पढ़ना सुहा रहा है मगर कमेन्ट को शब्द नहीं है.

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  24. सपने वे नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।

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  25. हम सब फैंकते रहते हैं पासे भविष्य जानने के लिए
    और दे देते हैं अपने आज का आधा हिस्सा इसी में.
    निराश नहीं होना उसे
    वह जानता है ..
    रात का सबसे अँधेरा पहर भोर से ठीक पहले आता है
    उसे बस पांव के निशान छोड़ते जाना है.

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

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...क्यूंकि कुछ टिप्पणियाँ बस 'टिप्पणियाँ' नहीं होती.