शुक्रवार, 9 जुलाई 2010



हाथ छूटा है जब से
कुछ तो कम कम सा है
उलटती पलटती हूँ
हाथों को
कई बार
अंगूठी के
इक इक नग को गिना है
हर बार पूरे निकले
..सात..
हाँ..
..हथेली पे मेरी
इक तिल हुआ करता था
तुम्हारी उंगलिओं में देखो ज़रा...
..शायद...


* * * * * * * * * * * * * * * *







दो प्यालों में
दो दो ही क्यूब्स तो डाले थे
जाने क्यूँ
फिर भी तुमने प्याले बदल लिए
चाय तो तुम्हारी भी उतनी ही मीठी थी
तुम भी न..
....कितने फ़िल्मी हो गये थे....

26 टिप्‍पणियां:

  1. "बेहतरीन-रोमानी-सी कविता..."

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  2. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति..दिल के आसपास!

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  3. ..हथेली पे मेरी
    इक तिल हुआ करता था
    तुम्हारी उंगलिओं में देखो ज़रा...
    ..शायद...
    इस पँक्तिउओं के बाद बहुत सी जगह खाली थी कमेन्ट उपर वाले कविता के लिये है। दिल की गहराई से निकली पँक्तियां बहुत अच्छी लगी। शुभकामनायें

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  4. ओये तू तो कमाल कर दित्ता ! मेरी उँगलियों पे भी इक तिल है पर...

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  5. Ungliyon ka til aur sugar cubes fir filmi andaaz....Bhala koi kyon na ho filmi...meri chaay mein to cubes bhi na dalna ...ek foonk maar dena meethi ho jayegi :-)

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  6. yun to dono hi bahut badhiya hai..

    par ye...

    तुम भी न..
    ....कितने फ़िल्मी हो गये थे....
    matlab samjhte hi laga...jabardasttttttttt
    Ice tea hi thi na?

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  7. पिछले जमाने मे दिलों की अदला-बदली होती थी..अब तिलों की अदला-बदली होती है..खैर जो जिसकी अमानत होती है..उसी को वापस हो जाती है..गुलज़ार सा’ब का ’मेरा कुछ सामान’ याद आये तो गलत नही..फ़िल्मी तो वो भी काफ़ी है...

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  8. तेरी आहटो ने
    मेरे ख्वाबो को
    सदियो सी तन्हाई क्यो दी है?

    एहसास जब शब्दो मे उतर कर
    ख्वाबो को छेडते है
    कविता का काजल
    मेरे आँखो मे उतर आते है
    एक तू है कि दूर ...................

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  9. तुम भी न..
    ....कितने फ़िल्मी हो गये थे....

    एक दिलकश सी अदा है इस रचना में ...
    कमाल कर दिया है आपने ...

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  10. Hello Dimple,

    Quite dreamy sequence... :)
    Romantic and full of freshness... Good work!

    Regards,
    Dimple

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  11. तुम्हारी उंगलिओं में देखो ज़रा...
    ..शायद..
    ...सुंदर एहसास।

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  12. तिल मिला क्या। या हाथ ही खो गया।

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  13. Behad khubsurat...koi bahut kuchh chura kar le gaya h shayad...

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  14. दिल को होती है खबर आप कहें या न कहें ,
    हमको मालूम है वो बात जो मशहूर नही ।

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  15. दो प्यालों में
    दो दो ही क्यूब्स तो डाले थे
    जाने क्यूँ
    फिर भी तुमने प्याले बदल लिए
    चाय तो तुम्हारी भी उतनी ही मीठी थी
    तुम भी न..
    ....कितने फ़िल्मी हो गये थे....

    vaah vaah!!

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  16. फिर भी तुमने प्याले बदल लिए
    चाय तो तुम्हारी भी उतनी ही मीठी थी

    अगर इतनी बात समझ में आ जाये तो दुनिया ही बदल जाये...

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  17. बेजोड़, वाह, मन पर जादू सा असर हुआ.. बहुत रोमांटिक

    .हथेली पे मेरी
    इक तिल हुआ करता था
    तुम्हारी उंगलिओं में देखो ज़रा...
    ..शायद...

    वाह.
    किन्तु, पहले पैरा में ही सारी बातें आ रही है यह प्रेम कविता सी लग रही है पर दूसरा पैरा पूर्णतः व्यक्तिगत बना रहा है.

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  18. सुशीला पुरी ने बड़ी दमदार शेर कही है.

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  19. दो प्यालों में
    दो दो ही क्यूब्स तो डाले थे
    जाने क्यूँ
    फिर भी तुमने प्याले बदल लिए
    चाय तो तुम्हारी भी उतनी ही मीठी थी
    तुम भी न..
    ....कितने फ़िल्मी हो गये थे....





    फेस बुक पे पढ़ा था .तभी भा गया था ....कभी कभी फ़िल्मी होना अच्छा होता है .क्यूंकि अक्सर जिंदगी फिल्म सी नहीं होती ना!!!




    एक ओर बड़ी गुस्ताख सी कविता है तिल की बाबत...यहाँ नहीं डाल सकता..जयादा निजी सी है .....खैर गुलज़ार का असर सा तारी होने लगा है तुम पर .....कम से कम तिल के बहाने ही सही.......

    ओर हाँ सुशीला जी शेर वल्लाह!!

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  20. दिल के आस- पास सा बहुत हद तक क्रंदित करने वाला...

    "मैंने कब कहा
    तुमसे,
    तुम आकाश हो जाओ
    मेरे लिए.....
    पर मैं-
    धरती होना चाहती हूँ
    तुम्हारे लिए........ "

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  21. wah wah ji wah wah
    kya baat hai

    http://sparkledaroma.blogspot.com/
    http://liberalflorence.blogspot.com/

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...क्यूंकि कुछ टिप्पणियाँ बस 'टिप्पणियाँ' नहीं होती.